शताब्दी समारोह के क्रम में ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ — युगचेतना के संकल्पों का आलोक

अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह के पावन क्रम में वैरागी द्वीप, हरिद्वार स्थित भव्य शताब्दी नगर आज आध्यात्मिक चेतना, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर हो उठा। इसी दिव्य वातावरण में ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ अत्यंत भावपूर्ण एवं गरिमामयी रूप से सम्पन्न हुआ। यह यात्रा युगऋषि परम् पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तपःप्रज्वलित चेतना तथा परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी वर्ष के संकल्पों को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी।

भारत भूमि को सदा से देवत्व की पुण्यधरा माना गया है। जहाँ देवचेतना का वास होता है, वहाँ आनंद, उमंग और नवयुग के आगमन की अनुभूति स्वतः प्रकट होती है। इसी देवभावना से ओतप्रोत हजारों पीत वस्त्रधारी साधक शताब्दी नगर के विशाल पंडाल में उपस्थित थे। यह अवसर अखंड दीप स्थापना एवं वंदनीया माताजी के शताब्दी समारोह का था, जिसने संपूर्ण वातावरण को युग परिवर्तन की चेतना से भर दिया।

ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ गायत्री परिवार की प्रमुख एवं नारी जागरण अभियान की वर्तमान ध्वजवाहक श्रद्धेया शैल जीजी, शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी तथा शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख आदरणीया शेफाली दीदी की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। उपस्थित गायत्री परिजनों ने इस क्षण को युग-निर्माण के नव संकल्प के रूप में अनुभव किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर एवं हरि सेवा आश्रम प्रमुख पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने शांतिकुंज की बहुआयामी सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा-प्रबंधन और सामाजिक पुनर्निर्माण जैसे प्रत्येक क्षेत्र में अखिल विश्व गायत्री परिवार निस्वार्थ भाव से अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज केवल एक आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि मानवता के सर्वांगीण उत्थान हेतु सतत सक्रिय एक जीवंत चेतना है।

श्रद्धेया शैल जीजी ने अपने भावपूर्ण संबोधन में परम पूज्य गुरुदेव की आंतरिक पीड़ा का स्मरण करते हुए उनके ऐतिहासिक लेख “क्या कारवां बिखर जाएगा?” का उल्लेख किया और दृढ़ स्वर में कहा—
“यह हमारा कारवां वशिष्ठों, विशिष्टों और विशेषज्ञों का काफ़िला है। यह बिखरने के लिए नहीं है। यह वह आँधी है, जो समाज की जड़ताओं को उखाड़ फेंकने का सामर्थ्य रखती है।”

कार्यक्रम के दौरान वंदनीया माताजी की लगभग 50 पुस्तकों तथा ज्योति कलश यात्रा स्मारिका का विमोचन भी किया गया, जिससे गुरुदेव की युगदृष्टि से ओत-प्रोत विचारों को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुँचाने का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हुआ।

समापन अवसर पर श्रद्धेया शैल जीजी, पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली दीदी द्वारा सभी ज्योति कलशों पर पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा को विधिवत रवाना किया गया। यह ज्योति कलश यात्रा शताब्दी समारोह के अंतर्गत आध्यात्मिक जागरण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक सशक्त प्रेरणा के रूप में प्रतिष्ठित हुई।