श्रद्धेया जीजी की उपस्थिति में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या ने किया देव संस्कृति विश्वविद्यालय सहित विभिन्न प्रदर्शनों का उद्घाटन

हरिद्वार।

शताब्दी नगर, शांतिकुंज में आयोजित जन्मशताब्दी महोत्सव के अंतर्गत श्रद्धेया जीजी की गरिमामयी उपस्थिति में गायत्री परिवार के प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, ‘युग साहित्य का दिग्दर्शन’ प्रदर्शनी एवं ‘ऋषि युग्म झांकी’ का विधिवत उद्घाटन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। उद्घाटन उपरांत डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा एवं जीवन निर्माण की प्रयोगशाला बताया। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि विचार, चरित्र और कर्म की त्रिवेणी है, जो भावी पीढ़ी को संस्कारित नेतृत्व प्रदान करेगी।

इसके पश्चात ‘युग साहित्य का दिग्दर्शन’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, जहाँ परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित साहित्य के माध्यम से युग परिवर्तन की विचारधारा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में गुरुदेव के साहित्यिक योगदान, जीवन दर्शन और सामाजिक चिंतन को दृश्य-श्रव्य माध्यमों द्वारा प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की निरंतर भीड़ उमड़ती रही।

कार्यक्रम के अंतर्गत ‘ऋषि युग्म झांकी’ का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के तप, त्याग और साधना से अनुप्राणित जीवन संदेश को सजीव रूप में दर्शाया गया है। झांकी के माध्यम से दोनों विभूतियों के युगद्रष्टा स्वरूप और मानवता के लिए उनके अवदान को भावपूर्ण अभिव्यक्ति मिली।

इस अवसर पर श्रद्धेया जीजी ने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि आत्मसात करने के लिए होते हैं। उन्होंने परिजनों से आह्वान किया कि वे गुरुदेव-माताजी के विचारों को अपने जीवन में उतारकर जन्मशताब्दी वर्ष को सार्थक बनाएं।

कार्यक्रम में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु, कार्यकर्ता एवं परिजन उपस्थित रहे। पूरा वातावरण श्रद्धा, प्रेरणा और युग निर्माण के संकल्प से ओतप्रोत दिखाई दिया।