जन्म शताब्दी समारोह–2026 के अंतर्गत पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि संकल्प कार्यक्रम संपन्न

हरिद्वार

अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित जन्म शताब्दी समारोह–2026 के अंतर्गत दिनांक 21 जनवरी 2026 को पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि संकल्प कार्यक्रम का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल एवं नदी शुद्धि जैसे विषयों पर गहन चिंतन एवं ठोस संकल्प लिए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ शांतिकुंज के विद्वान ऋत्विजों द्वारा वेदों में वर्णित पर्यावरण सूक्त के सामूहिक पाठ से हुआ। वेदमंत्रों के उच्चारण से संपूर्ण शताब्दी नगर आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा और वातावरण पवित्र भावनाओं से ओतप्रोत हो गया।

इसके पश्चात पर्यावरण संवर्धन अभियान के अंतर्गत अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा देश-विदेश में किए गए पर्यावरणीय कार्यों एवं उपलब्धियों पर आधारित एक प्रेरक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रसारण किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

पर्यावरण संकट पर चिंता, समाधान की ओर प्रेरणा

मंचीय कार्यक्रम में श्री मनु गौड़ जी, सदस्य, रणनीतिक सलाहकार समिति, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड ने कहा कि आज पर्यावरण की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के नेतृत्व में अखिल विश्व गायत्री परिवार जन-जन के भीतर पर्यावरण संरक्षण की चेतना जागृत करेगा और समाज को सकारात्मक दिशा देगा।

स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी जी, संत एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक, अध्यक्ष, सूरत बांग्लागिरी ने कहा कि यह एक अद्भुत संयोग है कि एक ओर हम एक महान विभूति की जन्मशताब्दी मना रहे हैं और दूसरी ओर माँ धरती की रक्षा का संकल्प भी ले रहे हैं। यह आयोजन आध्यात्मिकता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का सुंदर संगम है।

वृक्ष ही पर्यावरण संरक्षण का सबसे सशक्त माध्यम

स्वामी अवधेशानंद गिरि जी, आचार्य महामंडलेश्वर एवं अध्यक्ष, जूना अखाड़ा ने कहा कि जिस भारत भूमि में वृक्षों की पूजा की जाती है और उन्हें देवतुल्य माना जाता है, उसी देश में पिछले 50 वर्षों में विश्व के किसी भी अन्य देश की तुलना में सर्वाधिक वृक्षों की कटाई हुई है। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण को बचाना है तो वृक्ष ही सबसे सशक्त माध्यम हैं, और यह कार्य गायत्री परिवार प्रभावी ढंग से कर सकता है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप वही समर्थ कार्यकर्ता हैं जो समुद्र मंथन में इंद्र के साथ थे, सेतु निर्माण में भगवान राम के साथ थे और गिरिराज पर्वत उठाने में भगवान कृष्ण के साथ थे। यह प्रेरक उद्बोधन उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा का संचार कर गया।

गायत्री परिवार का दशकों से सतत पर्यावरणीय प्रयास

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, दलनायक, जन्म शताब्दी समारोह–2026, अखिल विश्व गायत्री परिवार ने कहा कि आज जिस विषय पर हम यहाँ एकत्रित हुए हैं, वह संपूर्ण मानवता के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। जल की उपलब्धता निरंतर कम हो रही है और जो जल उपलब्ध है, वह भी विषाक्त होता जा रहा है। वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली में रहने वाले एक 8 वर्षीय बच्चे के फेफड़ों की स्थिति 20 वर्षों से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के समान पाई गई है।

उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार ने इस संकट को दशकों पूर्व ही पहचान लिया था और उसी समय से समाधान की दिशा में कार्य आरंभ कर दिया था। श्रद्धेय गुरुदेव के एक उद्बोधन से प्रेरित होकर कोलकाता गायत्री परिवार के यूथ ग्रुप ने प्रति सप्ताह वृक्षारोपण का संकल्प लिया। इससे प्रेरणा लेकर पटना, दिल्ली, भोपाल सहित देश के अनेक नगरों में वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ हुए, जो आज कुल मिलाकर 20 हजार सप्ताह का सतत प्रयास बन चुके हैं।

अब तक गायत्री परिवार द्वारा 75 लाख से अधिक वृक्षों का रोपण तथा 12 नदियों का शुद्धिकरण किया जा चुका है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

766 जिलों में उपवन निर्माण का संकल्प

डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने बताया कि आज लिए गए संकल्पों के अंतर्गत भारत के सभी 766 जिलों में परम वंदनीया माताजी के नाम से एक-एक उपवन का निर्माण, हजारों वृक्षों का रोपण, एक तीर्थ शुद्धि, एक सरोवर शुद्धि तथा कम से कम एक नदी शुद्धि का संकल्प लेकर सभी प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में लौटेंगे।

पूज्य गुरुदेव के विचारों का वैश्विक प्रभाव

योग गुरु स्वामी रामदेव जी, संस्थापक, पतंजलि योगपीठ ने कहा कि समस्त ईश्वरीय ज्ञान को लोकभाषा में संसार के करोड़ों लोगों तक पहुँचाने का प्रचंड पुरुषार्थ यदि किसी ने किया है, तो वे पूज्य आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा जी हैं। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे पूज्य गुरुदेव की वाणी का श्रवण करते हैं, जिससे उन्हें दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व के कोने-कोने में गायत्री के साधक सक्रिय हैं। जिनके रोम-रोम में धरती माता, वेद माता और भारत माता समाई हुई हैं, वही हमारे पूज्य आचार्य श्री हैं।

गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर श्री भूपेंद्र कैंथोला जी, प्रधान महानिदेशक (पूर्व क्षेत्र), पीआईबी, कोलकाता; श्री रमणकांत जी, संस्थापक, भारतीय नदी परिषद; श्री दयाशंकर जी, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उत्तर प्रदेश; श्री मदन कौशिक जी, माननीय विधायक, हरिद्वार; श्री गोपाल आर्य जी, राष्ट्रीय संयोजक, आरएसएस पर्यावरण विभाग; श्री किशोर उपाध्याय जी, संरक्षक, उत्तराखंड देवभूमि जन कल्याण संगठन सहित अनेक गणमान्य विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

तरु-पूजन एवं पौध वितरण के साथ समापन

कार्यक्रम के समापन अवसर पर आमंत्रित संतों एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा तरु-पूजन किया गया। इसके साथ ही देशभर से पधारे सभी जिलों के प्रतिनिधियों को प्रतीकात्मक रूप से एक-एक आंवले का पौधा वितरित किया गया, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह संकल्प धरातल पर साकार हो सके।