समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक इंटरव्यू में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति एवं जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने आगामी शताब्दी समारोह की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
डॉ. पंड्या जी ने बताया कि कार्यक्रमों की शुरुआत ध्वज वंदन से होगी। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ गायत्री परिवार के ध्वज की रचना की थी, जिसके चार मूल आधार — एकता, समता, सुचिता और ममता हैं, जिनमें नर-नारी की समानता का भाव निहित है। जाति, वंश, वर्ग से ऊपर उठकर समस्त मानव जाति को एक मानने का जो बीज गुरुदेव ने रोपा था, वह आज वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
ध्वज वंदन कार्यक्रम में उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री, दो से अधिक केंद्रीय मंत्री, देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद, आध्यात्मिक संत एवं गायत्री परिवार के लगभग हजारों कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आरंभ होगा।
उन्होंने बताया कि अगले दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय का सप्तम समावर्तन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसी के साथ एक ऐतिहासिक आदिवासी सम्मेलन भी होगा, जिसमें 12,000 से अधिक आदिवासी भाई-बहन देश के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से भाग लेंगे। इनमें अंडमान, त्रिपुरा, मिज़ोरम, मेघालय सहित वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहाँ आज भी सभ्यता के चरण अपेक्षाकृत कम पहुँचे हैं।
डॉ. पंड्या जी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ये प्रतिभागी केवल आदिवासी प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि गायत्री परिवार के संकल्पित कार्यकर्ता हैं। वे भारत की उस मूल पहचान को सामने लाएँगे, जिसमें प्रकृति पूजन, भूमि संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सदियों से निहित रही है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता में आदिवासी समाज के योगदान की असंख्य गाथाएँ झारखंड, छत्तीसगढ़, बस्तर और पूर्वोत्तर भारत में आज भी जीवंत हैं। इन सभी का एक साथ समागम संभवतः पहली बार हरिद्वार की पावन धरती पर देखने को मिलेगा।
इस अवसर पर माननीय केंद्रीय गृह मंत्री, माननीय रक्षा मंत्री, उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सहित कई केंद्रीय मंत्री—जैसे माननीय शिवराज सिंह चौहान जी, माननीय जे.पी. नड्डा जी, माननीय वीरेन्द्र कुमार जी, माननीय गजेन्द्र सिंह शेखावत जी—के आगमन की भी पुष्टि की गई है।
हरिद्वार को संत नगरी बताते हुए डॉ. पंड्या जी ने कहा कि धर्म और अध्यात्म जगत के अनेक प्रतिष्ठित संत इस अवसर पर अपने आशीर्वचनों से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान करेंगे। इनमें स्वामी अवधेशानंद जी, स्वामी रामदेव जी, स्वामी कैलाशानंद जी, पूज्य मुनि चिदानंद जी, आचार्य बालकृष्ण जी, महंत रविंद्र पुरी जी सहित अन्य प्रमुख संत सम्मिलित होंगे। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वचनों से ज्योति कलश यात्रा को एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी, जिसकी प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी।

