वर्ष 2024 से निरंतर भारत के गाँव-गाँव ही नहीं, बल्कि विश्व के 80 से अधिक देशों के अनेक शहरों में अखंड दीपक की दिव्य आभा बिखेरते हुए शताब्दी वर्ष के प्रथम चरण के अंतर्गत आयोजित शताब्दी समारोह हेतु विश्व भ्रमण कर रहे ज्योति कलश अब अपने उद्गम स्थल गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुँचना प्रारंभ हो गए हैं।
पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माता जी की तप ऊर्जा से अनुप्राणित तथा श्रद्धेय द्वय के सतत मार्गदर्शन में देश-विदेश में प्रवास के उपरांत 14 जनवरी 2026 को 18 दिव्य ज्योति कलशों का शांतिकुंज में पावन आगमन हुआ। ये ज्योति कलश ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ गुजरात, आंध्र प्रदेश-तेलंगाना, बिहार, झारखंड, पश्चिमोत्तर भारत, छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा के शहरों, गाँवों, नगरों और कस्बों में युगनिर्माण की अलख जगाते हुए शांतिकुंज पहुँचे।
इस पावन अवसर पर गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली दीदी द्वारा प्रखर प्रज्ञा–सजल श्रद्धा समाधि स्थल पर पुष्पार्चन कर ज्योति कलशों का विधिवत पूजन संपन्न किया गया। साथ ही ज्योति कलशों के साथ प्रवज्या कर रहे सृजन साधकों का तिलक कर आत्मीय स्वागत किया गया।
वेदमंत्रों के पावन उच्चारण, शंखनाद की मंगल ध्वनि एवं प्रज्ञा बैंड के सान्निध्य में भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शांतिकुंज परिसर का भ्रमण करते हुए यह शोभायात्रा गायत्री माता मंदिर प्रांगण में स्थित साधना कक्ष पहुँची, जहाँ दिव्य ज्योति कलशों की स्थापना कर आरती के साथ शोभायात्रा का समापन हुआ।
देश-विदेश से निरंतर शांतिकुंज पहुँच रहे अखंड दीप के ज्योति कलशों का यह भव्य स्वागत, शीघ्र आरंभ होने जा रहे जन्मशताब्दी महोत्सव का दिव्य शंखनाद कहा जाए, तो यह किसी भी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं होगी।

