ज्योति कलश यात्रा का भव्य एवं अभूतपूर्व शुभारंभ

वैश्विक एकता, सांस्कृतिक चेतना और युग-परिवर्तन का सजीव उत्सव

परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह के पावन क्रम में ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ एक ऐतिहासिक, भव्य एवं अविस्मरणीय क्षण के रूप में सम्पन्न हुआ। यह यात्रा युगऋषि परम पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की विचार-ज्योति को जन-जन तक तथा विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने के संकल्प का सजीव प्रतीक बनकर प्रकट हुई।

भारत सहित विश्व के 14 से अधिक जोनों से ज्योति कलश लेकर गायत्री परिवार के परिजन श्रद्धा, अनुशासन और उल्लास के साथ हरिद्वार पहुँचे। देश-विदेश से आए लाखों परिजनों की सहभागिता ने इस यात्रा को वैश्विक एकता, सामूहिक चेतना और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का विराट स्वरूप प्रदान किया।

इस पावन अवसर पर आदरणीया श्रद्धेया शैल जीजी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली दीदी ने स्वयं ज्योति कलश धारण कर बहनों का आत्मीय स्वागत किया। पुष्पवर्षा के साथ ज्योति कलश यात्रा के विधिवत उद्घोष ने सम्पूर्ण वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।

20 जनवरी 2026 को वैरागी द्वीप स्थित शताब्दी नगर में निकली यह दिव्य यात्रा ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो भगवान भोलेनाथ एक बार फिर अपने ससुराल कनखल पधारे हों। देवों की नगरी हरिद्वार—माँ गंगा, माता सती, ऋषियों और परम पूज्य गुरुदेव व परम वंदनीया माताजी की तप-साधना की कर्मभूमि—उस दिन अलौकिक आध्यात्मिक आभा से आलोकित दिखाई दी। पीत वस्त्रों में सजे परिजनों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो देवताओं का समूह धरती पर अवतरित हो गया हो।

ज्योति कलश यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश एवं पूर्वोत्तर राज्यों से आए आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने भारत की प्राचीन लोक कलाओं और लोक संस्कृतियों का जीवंत प्रदर्शन किया। वहीं उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश से आए परिजनों ने भारत की धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती भव्य झांकियों से यात्रा को और भी दिव्य स्वरूप प्रदान किया।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने लाल मशाल अंकित केसरिया पताका दिखाकर ज्योति कलश यात्रा को विधिवत रवाना किया। इस शोभायात्रा में विश्व के अनेक देशों से आए प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। फ़िजी, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, ओमान, बहरीन, ब्रिटेन, बाल्टिक देश, जापान, अमेरिका, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल, युगांडा, केन्या, तंजानिया सहित पूर्वी अफ्रीका के देशों से आए प्रतिनिधि अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वजों के साथ यात्रा में सम्मिलित हुए।

इसके साथ ही भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इस यात्रा को राष्ट्रव्यापी स्वरूप प्रदान किया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से कोहिमा तक, हिमालय से समुद्र-तटों तक और मरुस्थलों से हरित मैदानों तक की सहभागिता ने ज्योति कलश यात्रा को सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक समरसता और अंतरराष्ट्रीय सौहार्द का जीवंत उदाहरण बना दिया।

सम्पूर्ण वैरागी द्वीप श्रद्धा, उल्लास और युग-परिवर्तन के संकल्प से ओत-प्रोत रहा। यह अनुभूति गहराती गई कि ज्योति कलश यात्रा आने वाले समय में नवचेतना, नवसंस्कार और नव निर्माण का सशक्त आधार बनेगी तथा युगऋषि के विचारों को वैश्विक मानवता तक पहुँचाने का सुदृढ़ माध्यम सिद्ध होगी।