दिनांक 20 जनवरी 2026 को आयोजित ज्योति कलश शोभायात्रा की अपूर्व एवं अतुलनीय छटाओं के दर्शन के पश्चात संध्या वेला में वैरागी द्वीप शताब्दी नगर में एकत्रित विशाल जनसमुदाय को शांतिकुंज महिला मंडल की प्रमुख आदरणीया शेफाली पंड्या दीदी ने संबोधित किया।
अपने भावपूर्ण संबोधन में आदरणीया दीदी ने कहा कि परम वंदनीया माता जी के व्यक्तित्व में ममता, करुणा, सेवा, समर्पण और साहस जैसे सभी गुण समाहित थे। इसके साथ ही माता जी स्वयं अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और संगठनकर्ता का ऐसा उदाहरण थीं, जो अन्यत्र दुर्लभ है। शेफाली दीदी ने कहा कि सृष्टि के दो प्रमुख आधार हैं—ज्ञान और संवेदना। ज्ञान में प्रखरता होती है और संवेदना श्रद्धा, सजलता को जन्म देती है। जब तक ज्ञान और श्रद्धा का समन्वय नहीं होता, तब तक जीवन में समग्रता संभव नहीं है।
आदरणीया दीदी ने कहा कि प्रखर ज्ञान के प्रतीक परम पूज्य गुरुदेव हैं, जबकि सजल संवेदना की प्रतिमूर्ति वंदनीया माता जी हैं। उन्होंने गुरुदेव के कथन का उल्लेख करते हुए कहा- “यह गायत्री परिवार केवल मेरी तप-साधना से नहीं बना है, बल्कि परम वंदनीया माता जी ने इसे अपने प्रेम, आत्मीयता और करुणा से सींच-सींचकर खड़ा किया है।”
अपने उद्बोधन में आदरणीया दीदी ने शपथ समारोह से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए वंदनीया माता जी की संवेदनशीलता और करुणा को उजागर किया। उन्होंने बताया कि शपथ समारोह की तैयारियों के दौरान एक स्थान पर निवास कर रहे विषैले जीवों से माता जी ने स्नेहपूर्वक वहाँ से चले जाने को कहा। कार्यकर्ताओं से चर्चा करते हुए माता जी ने कहा कि अब वहाँ किसी को कोई कठिनाई नहीं होगी। इस पर एक व्यक्ति द्वारा यह कहे जाने पर कि साँप-बिच्छुओं को मारा भी जा सकता है, माता जी अत्यंत गंभीर एवं क्रुद्ध हो गईं और कहा—“तुम उनके घर में घुसकर उनका आश्रय नष्ट कर रहे हो और फिर उन्हें मारने की बात करते हो? तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं केवल तुम लोगों की ही माता हूँ? मैं इस जीव-जगत के समस्त प्राणियों की माता हूँ।”
आदरणीया दीदी के इन भावपूर्ण वचनों ने वहाँ उपस्थित हजारों परिजनों को वंदनीया माता जी की करुणामयी स्मृतियों से भावविह्वल कर दिया और अनेक नेत्र सजल हो उठे।
इसके पश्चात सांस्कृतिक संध्या में बालक-बालिकाओं एवं नारी शक्ति द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए आदरणीया शेफाली पंड्या दीदी ने सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

