हरिद्वार: बैरागी द्वीप पर मौन पाषाणों से गूंजता युग-निर्माण का संदेश

हरिद्वार के बैरागी द्वीप पर गायत्री परिवार द्वारा निर्मित किए जा रहे शताब्दी नगर में इन दिनों अभूतपूर्व गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। परम वंदनीया माता जी एवं अखंड दीप के शताब्दी समारोह की तैयारियों के अंतर्गत, कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों स्वयंसेवक सामूहिक रूप से श्रमदान कर रहे हैं।

गायत्री परिवार के युग-सृजन सैनिकों के सतत पुरुषार्थ से बैरागी द्वीप का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक ओर नगर को भव्य रूप देने के लिए संरचनात्मक एवं सजावटी कार्य चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिल्पकारों के कुशल हाथों से पाषाणों को कलात्मक आकृतियों में ढाला जा रहा है। ये पाषाण मूर्तियाँ केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं हैं, बल्कि विचार-क्रांति के प्रतीक के रूप में उभरकर सामने आ रही हैं।

निर्माण स्थल पर तैयार की जा रही लाल मशाल की आकृतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। आयोजकों के अनुसार, ये आकृतियाँ युग-परिवर्तन और विचार-क्रांति के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करती हैं। शिल्पकला के माध्यम से जड़ पाषाणों को चेतना का संवाहक बनाकर, गुरुदेव के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शताब्दी नगर में जुटे विद्वान, कलाकार, स्वयंसेवक एवं भावनाशील कार्यकर्ता सामूहिक रूप से इस आयोजन को एक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप दे रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यह प्रयास केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता को युग-निर्माण की दिशा में प्रेरित करने का माध्यम है।

शताब्दी समारोह की तैयारियों के साथ-साथ यह स्थल अब सेवा, साधना और सृजन का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है, जहाँ पत्थर भी मौन रहकर परिवर्तन का संदेश दे रहे हैं।