हरिद्वार, शांतिकुंज — अध्यात्म, संस्कृति और साधना के पावन संगम पर आज गीता जयंती एवं श्रद्धेया शैल जीजी के अवतरण दिवस का भावपूर्ण आयोजन अत्यंत श्रद्धा व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। समूचे गायत्री परिवार ने इस अवसर पर भावभरी शुभकामनाएँ अर्पित कीं और समर्पण, सेवा तथा संस्कारों से ओतप्रोत जीवन जीने का संकल्प लिया।
गीता जयंती के पावन अवसर पर, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को प्रदान किए गए दिव्य उपदेश—‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’—के संदेश को पुनः स्मरण करते हुए संकल्प लिया गया कि अपने कर्म, निष्ठा और युगधर्म का पालन करते हुए समाज में सद्भाव, सेवा और एकता की ज्योति प्रज्वलित की जाएगी।
इसी शुभ अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रेरणास्रोत, आदर्श मातृरूपा श्रद्धेया शैल जीजी के अवतरण दिवस का भी सामूहिक रूप से अभिनंदन किया गया। सभी परिजनों ने स्नेह, श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ शैल जीजी को जन्मदिवस की मंगलकामनाएँ अर्पित करते हुए यह अनुभूति व्यक्त की कि उनका जीवन सभी साधकों के लिए प्रेम, अनुशासन, संवेदना और मातृत्व का दिव्य आदर्श है।
कार्यक्रम के दौरान—
- सामूहिक गायत्री मंत्र एवं शांतिपाठ का आयोजन हुआ
- गीता संदेश पर आधारित विचार-प्रवाह आयोजित हुए
- सेवा, साधना और संस्कार की तीनांे धाराओं को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया गया
- मातृ-सत्ता एवं नारी-शक्ति के योगदान पर विचार प्रस्तुत किए गए
समस्त परिजनों ने यह भाव व्यक्त किया कि शैल जीजी का अवतरण मानवता के उत्थान और युग परिवर्तन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति रहा है, और उनके आदर्शों पर चलकर समाज में नई आशा, नई ऊर्जा तथा नई दिशा का सृजन होगा।
अंत में समर्पण संकल्प एवं मंगलकामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
“हे प्रभो, जीवन हमारा यज्ञमय कर दीजिए।”
— अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज, हरिद्वार

