हरिद्वार/कनखल | 4 दिसंबर
अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्म शताब्दी वर्ष 2026 का शुभारंभ कनखल स्थित बैरागी कैंप में आयोजित वसुधा वंदन समारोह के साथ दिव्य एवं भव्य रूप से हुआ। विशाल क्षेत्र को भव्य रूप से सजाकर किए गए इस आयोजन में हजारों साधक–स्वयंसेवक, संत–महात्मा, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन एवं देश–विदेश से आए विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।
समारोह में आध्यात्मिकता, संस्कृति, राष्ट्र–सेवा और मानव–एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
रज–वंदन का ऐतिहासिक क्षण—51 तीर्थों की पवित्र रज–जल का पूजन
समारोह की मुख्य विशेषता रही—देश के 51 प्रमुख तीर्थों और आध्यात्मिक स्थलों से संगृहीत पवित्र रज–जल का वैदिक विधि से रज–वंदन और संकल्प–पूजन।
सभी अतिथियों ने विश्व–शांति, सांस्कृतिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और मानवता की सेवा का संकल्प लिया।
राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) का संदेश
रज–वंदन करने के पश्चात राज्यपाल ने कहा—
“अखंड ज्योति केवल एक दीप नहीं है। यह अखंड भारत की भावना, धर्म–जागरण की चेतना और भारत के आध्यात्मिक तत्त्व का जीवंत प्रतीक है। यह दीप सत्य–नैतिकता और एकता के मार्ग को प्रकाशित करता है।”
उन्होंने कहा—
“यह रज केवल मिट्टी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का स्पंदन है। गायत्री परिवार ने सेवा, स्वच्छता, अनुशासन और नैतिक उत्थान के माध्यम से समाज–निर्माण की मिसाल प्रस्तुत की है।”
उन्होंने स्वयंसेवकों की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा—
“एक महीने में हजारों स्वयंसेवकों ने श्रम–स्वेद से जो अद्भुत व्यवस्था बनाई है, वह अनुशासन और राष्ट्र–भक्ति का प्रेरक उदाहरण है।”
डॉ. चिन्मय पंड्या—शताब्दी वर्ष माताजी की प्रेरणा को आगे बढ़ाने का संकल्प
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं शताब्दी दल–नायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा—
“माताजी ने नारी को परिवार और समाज की आधारशिला के रूप में देखा। उन्होंने संस्कार, सेवा और शिक्षा के माध्यम से नारी को सामर्थ्य प्रदान किया। शताब्दी वर्ष, माताजी की इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाने का संकल्प है।”
उन्होंने आगे कहा—
“जो कार्य सामान्यतः अत्यंत कठिन माना जाता है, हमारे स्वयंसेवकों ने उसे अल्प समय में अपने श्रम–स्वेद से संभव कर दिखाया है। एक माह से हजारों सेवक स्थल–व्यवस्था, मार्ग–सज्जा, स्वच्छता और संरचना संबंधी तैयारी में जुटे थे।”
उन्होंने सभी स्वयंसेवकों और भरोसा देने वाली जनता को आभार व्यक्त किया।
शंकराचार्य श्री राज–राजेश्वरानंद जी का वक्तव्य
“भारतीय संस्कृति की जड़ें गुरु–शिष्य परंपरा में हैं। गुरु कुम्हार है और शिष्य कुंभ। गुरु बाहर से थपकी और भीतर से सहारा देकर जीवन को आकार देता है। माता–पिता, गुरु और ईश्वर—ये सनातन संस्कृति की एक ही धारा हैं।”
उन्होंने कहा—
“गायत्री परिवार ने इन मूल्यों को केवल प्रचार में नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारा है। यह समाज–जागरण की सशक्त ऊर्जा है।”
भाजपा प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी का उद्बोधन
“गायत्री परिवार ने वसुधैव कुटुम्बकम् की परंपरा को जीवन में उतारकर भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान किया है। संस्कार–निर्माण, नारी–जागरण और युवा नेतृत्व के क्षेत्र में इनके कार्य प्रेरक और अनुकरणीय हैं।”
विधायक मदन कौशिक का संदेश
“हम बदलेंगे, युग बदलेगा—यह केवल नारा नहीं, सामाजिक क्रांति का मंत्र है। गायत्री परिवार की सेवा–केंद्रित कार्यशैली उत्तराखंड और हरिद्वार के लिए रोल मॉडल है।”
राष्ट्रीय सह–संगठन महामंत्री श्री शिवप्रकाश जी का संदेश
“अखंड दीप धर्म–जागरण की ज्योति है और माताजी नारी–जागरण की अधिष्ठात्री शक्ति। सेवा, अनुशासन और संगठन—यह आधुनिक भारत के निर्माण का मजबूत आधार है।”
उन्होंने कहा—
“गायत्री परिवार की संगठनात्मक शक्ति समाज परिवर्तन का सर्वोत्तम उदाहरण है।”
हजारों स्वयंसेवकों का अद्भुत श्रम–स्वेद
समारोह की सभी व्यवस्थाओं—
स्वच्छता, स्वागत, जल–व्यवस्था, भोजन, यातायात, अनुशासन, सुरक्षा, ध्वनि–प्रणाली—
में तीन वर्ष के बालक से 80 वर्ष के वरिष्ठ तक हजारों सेवकों ने हिस्सा लिया।
पूरे क्षेत्र में समर्पण, अनुशासन और एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

